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स्विफ्ट पर पाबंदी से रूस में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की मुश्किलें बढ़ी

स्विफ्ट पर पाबंदी से रूस में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की मुश्किलें बढ़ी।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर सोसाइटी ऑफ वर्ल्डवाइड इंटरनेट बैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन  (स्विफ्ट) पेमेंट ट्रांसफर पर प्रतिबंध से वहां पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके परिवार वालों के लिए पैसे भेजने में दिक्कत आनी शुरू हो गई है। भारत के कुछ बैंक ने सभी शाखाओं को इस तरह के पेमेंट न भेजने के लिए आंतरिक दिशा निर्देश भी जारी कर दिए हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत में करीब 16000 छात्र हर साल पढ़ने के लिए रूस जाते हैं। छात्रों की फीस के साथ-सथ खर्च के लिए पैसे परिवार वाले भारतीय बैंकों से भेजते हैं। यह रकम स्विफ्ट बैंक की प्रणाली से भारतीय बैंकों से रूस की बैंकों में भेजे जाते हैं।


कुछ मदों पर दी गयी ढील

 फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट एसोसिएशन यानी फियो के सेक्रेटरी जनरल अजय सहाय ने बताया कि स्विफ्ट प्रतिबंधों के साथ-साथ कुछ मदो में ढील दी गई है। यह प्रतिबंध पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है। कृषि, दवावों और उर्जा के क्षेत्र को छोड़कर बाकी शेत्र में पूरी तरह से प्रतिबंध लगे हैं। ऐसे में बैंक पेमेंट देने से कतराते हैं।

आरबीआई आयी हरकत में-

 पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अब रिजर्व बैंक भी हरकत में आ गया है। केंद्रीय बैंक ने सभी बैंकों से रूस भेजे जाने वाली रकम का ब्यौरा मांगा है ताकि उसी हिसाब से पेमेंट के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने पर काम शुरू किया जा सके। छात्रों के साथ-साथ कारोबारियों को भी कई मोर्चो पर इस कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं कुछ मामलों में पेमेंट ट्रांसफर की इजाजत आसानी से है लेकिन यह व्यवस्था कब तक चलेगी इस पर अनिश्चितता जरूर बनी हुई है।

वैकल्पिक व्यवस्था:-

 जानकारों की राय में सरकारी पेमेंट की दिशा में मुश्किल नहीं आएगी लेकिन व्यक्तिगत तौर पर या फिर कारोबारी गतिविधियों को चलाने के लिए नई व्यवस्था बनानी पड़ सकती है। इस दिशा में भी उसकी तरफ से भारत में बैंक खोलने या फिर रकम के बराबर यहां से निर्यात जैसे विकल्पों का आजमाया जा सकता है।

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