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Russia out of "SWIFT" technology || पश्चिमी देशों ने उठाया बड़ा कदम, रूस को किया "SWIFT" तकनीक से बाहर

Russia out of "SWIFT" technology || पश्चिमी देशों ने उठाया बड़ा कदम, रूस को किया "SWIFT" तकनीक से बाहर

यूक्रेन रूस युद्ध में जिस बात की उम्मीद थी कि रूस पर कोई आर्थिक परिपथ प्रतिबंध लगे ऐसे हो जिससे रूस को तगड़ा झटका लगे अल्टीमेटली पश्चिमी देश अमेरिका समेत जर्मनी यूनाइटेड किंगडम यूरोपियन यूनियन कनाडा यूएस आदि प्रमुख देश स्विफ्ट तकनीक के माध्यम से रसिया के बैंकों के साथ जुड़े हुए हैं उसमें प्रतिबंध लगाने के लिए तैयार हो गए हैं।


 यूरोपियन यूनियन के प्रेसिडेंट Ursula Van der Leyen  उन्होंने कहा है कि-

 First , we commit to ensuring that a certain number of Russian banks are removed from SWIFT . It will stop them from operating worldwide and effectively block Russian exports and imports. 

"सबसे पहले, हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि स्विफ्ट से निश्चित संख्या में रूसी बैंक हटा दिए जाएं।  यह उन्हें दुनिया भर में काम करने से रोकेगा और रूसी निर्यात और आयात को प्रभावी ढंग से रोकेगा।"-Ursula Van der Leyen 


यूरोपीय यूनियन ने रूस की बैंकों के साथ होने वाला अंतर्राष्ट्रीय व्यापार स्विफ्ट पेमेंट सिस्टम (Global Payment System-SWIFT) से रूस बाहर निकाल दिया गया है।
       इस युद्ध में जर्मनी बचने की कोशिश कर रहा था क्योंकि जर्मनी के साथ रूस का एक व्यापारिक समझौता NORD STREAM-2 गैस पाइपलाइन था। इसमें कि रूस के अंदर से बहुत अधिक मात्रा में जर्मनी, रूस से गैस आयात करता है। जोकि जर्मनी जैसे देशों में पूरे समय (लगभग साल के आधे से अधिक समय बर्फ से ढके देश) रहते हैं ऐसे देशों में गैस से घरों को गर्म करने और आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन में उपयोग किया जाता है। अगर जर्मनी Russian बैंक को Swift से प्रतिबंधित करता है तो जर्मनी का रूस से आयात-निर्यात एवं लेनदेन पूरी तरह बाधित हो जाएगा। यानी कि एक तरफा होने वाला नुकसान नहीं है इससे केवल रूस को नुकसान होने वाला नही था, जर्मनी के निवेशक (इन्वेस्टर) हैं उन्हें भी बहुत नुकसान होने वाला था। जर्मनी अब तक इसका विरोध करता आ रहा था लेकिन अब जर्मनी, रूस को SWIFT तकनीक से बाहर करने को गया है।

स्विफ्ट बैन से कैसे पहुंचेगी रूस को चोट?


 लंबे समय तक स्विफ्ट बैन होने से रूस की अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। इससे आयात का भुगतान करना एवं निर्यात का पैसा पाना मुश्किल होगा। सबसे ज्यादा असर रूस के तेल और गैस के लाभ (प्रॉफिट) पर पड़ेगा।

2012 में ईरान पर स्विफ्ट बैन होने से उसकी तेल की कमाई आधी रह गई है।

रूस बहुत अधिक मात्रा में हथियार, प्राकृतिक गैस, कोयला, प्राकृतिक ईंधन आदि बेचता है। यह सब वस्तुये इधर से उधर जा रही है। उनके पैसे वसूले गा कैसे?? ऐसी स्थिति में रूस को बहुत बड़ा नुकसान होगा। अल्टीमेटली इसके ट्रांजैक्शन प्रभावित होंगे। इसका मतलब रूस के पास अब अन्य देशों से पैसा नहीं पहुंचेगा ऐसी स्थिति में रूस क्या करेगा??

स्विफ्ट की मार से बचने को तैयार है रूस??


 2014 में रूस ने स्विफ्ट का विकल्प एसपीएफएस (SPFS) डिवेलप किया था। रूस इसके लिए पहले से ही तैयार था। उसको यह पता था कि अगर हम कुछ करेंगे तो यह पश्चिमी देश कुछ ना कुछ तो ज़्यादती करेंगे। ऐसी स्थित में इन्होंने अपने लिए एक अन्य विकल्प बना कर रखा था और वह उसमें 2014 से काम कर रहे थे।

 जब रूस ने सन 2014 में क्रीमिया के ऊपर कब्जा किया गया था। तब क्रीमिया में कब्जा करते समय यूनाइटेड स्टेट्स ने G8 से रूस को हटा दिया था। और उसको G7 बनाकर रखा।
        ऐसी स्थिति में रूस ने अपना विकल्प बनाना शुरू कर दिया था और अपने लिए एसपीएफएस (SPFS) बनाया। यह जो एसपीएसएस सिस्टम है यह रूस के द्वारा अपने मित्र देशों को आपस में एक दूसरे से जोड़ने के लिए बना दिया गया था। जिसमें लगभग 23 देशों के 400 से अधिक बैंक जुड़े हुए हैं। रूस अपने घरेलू पेमेंट का 20% हिस्सा एसपीएफएस (SPFS) से करता है।

◆ रूस चीन के पेमेंट सिस्टम सीआईपीएस (CIPS) का यूज़ भी करता है। रूस पेमेंट के लिए फोन मैसेजिंग एप्स या ई-मेल का सहारा लेता है।

◆ रूस स्विफ्ट के बजाय क्रिप्टो करेंसी के जरिए कर सकता है पेमेंट।

 ◆रूस को स्विफ्ट सिस्टम से हटाने पर यूरोपीय यूनियन से नुकसान होगा लेकिन रूस के साथ मित्र राष्ट्रों से व्यापार में कोई नुकसान नहीं होगा।

 यूरोप के साथ रूस का बड़ा व्यापार-


रसियन अपना बहुत बड़ा व्यापार लगभग 15-20 बिलियन डॉलर NORD STREAM-2 गैस पाइपलइन का हाल में ही समझौता किया था।

जिसमें की रसिया को जबरस्त फायदा होने वाला था। जिसमें कि जर्मनी के द्वारा बहुत अधिक मात्रा में पैसा मिलने वाला था। हालांकि नुकसान दो तरफा है यूरोप को भी बहुत बड़ा नुकसान होगा। यूरोप बहुत अधिक मात्रा में रूस से सस्ती गैस आयात कर रहा था। नीदरलैंड और जर्मनी रूस के प्रमुख आयातक देश हैं। रूस की बिक्री घटेगी, अमेरिका और जर्मन बैंकों का रूप से लेनदेन बुरी तरह प्रभावित होगा।

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