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100 साल पुराने लोकप्रिय सुप्रसिद्ध नाटक "चिंतामणि पद्य नाटकम" पर आंध्र प्रदेश सरकार ने लगाया प्रतिबंध, आइए जाने क्या है पूरा मामला

आंध्र प्रदेश राज्य सरकार ने "चिंतामणि पद्य नाटकम" नामक 100 साल पुराने लोकप्रिय, सुप्रसिद्ध तेलगु नाटक पर प्रतिबंध लगा दिया है।


क्या है "चिंतामणि पद्य नाटकम" ?


नाटक 1920 में नाटककार कल्लाकुरी नारायण राव द्वारा लिखा गया था। जो एक समाज सुधारक भी थे।
      नाटक चिंतामणि के बारे में जो एक वेश्या और भगवान कृष्ण का भक्त है जो भजन गाकर मोक्ष पाता है। 
    आर्य वैश्य समुदाय के एक व्यवसाई सुब्बी शेट्टी द्वारा उसका प्यार किया जाता है। जो चिंतामणि के प्रति आकर्षण के कारण अपना धन और परिवार खो देता है।
     यह नाटक राज्य भर में मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में त्योहारों और मेलों के दौरान प्रदर्शित किया जाता है।

इसे लेकर क्यों है विवाद?


 मूल नाटक में एक सामाजिक संदेश था, लेकिन कई वर्षों से इसे विशुद्ध रूप से मनोरंजन के लिए संशोधित किया गया। नाटक के अधिकांश भाग में केंद्रीय चरित्र सुब्बी शेट्टी का मजाक उड़ाया गया है। खासकर अपनी सारी संपत्ति को अपने दोषों के लिए, खोने के लिए। साथ ही सामग्री और संवाद आपत्तिजनक है। और केंद्रीय चरित्र को हमेशा एक छोटे और गहरे रंग के व्यक्ति के रूप में चित्रित किया जाता है। शेट्टी के चरित्र को जिस तरह से चित्रित किया जाता है उससे पूरा समुदाय कलंकित है।

इस नाटक को क्यों किया गया प्रतिबंधित?


 आर्य वैश्य समुदाय नाटक प्रतिबंध लगाने के लिए कई वर्षों से सरकारों से याचिका दायर कर रहा है, यह कहते हुए कि यह उन्हें एक नकारात्मक रोशनी में चित्रित करता है।


क्या प्रतिबंध से बचा जा सकता था?


 राज्य सरकार ने शेट्टी के चरित्र पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय उसे नाटक से बाहर निकालने की संभावना तलाश थी, लेकिन उसे एक केंद्रीय चरित्र के रूप में पाया।

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु-


◆ नाटक के मंचन पर प्रतिबंध लगाने का सरकार का निर्णय विशेष समुदाय के सदस्यों द्वारा प्रसिद्ध तेलुगु नाटक में कुछ संवादों और एक पात्र के चित्रण पर आपत्ति जताए जाने के बाद लिया गया।

◆ सन 1920 में नाटककार कल्लाकुरी नारायण राव द्वारा लिखित इस लोकप्रिय, प्रसिद्ध तेलुगु नाटक के कलाकारों ने 2021 में अपना शताब्दी समारोह मनाया था।

◆ इस नाटक में लेखक ने इस बात पर प्रकाश डाला है कि कैसे लोग कुछ सामाजिक बुराइयों का शिकार होकर अपने परिवारों की उपेक्षा करते हैं।

◆ सुब्बी शेट्टी, चिंतामणि, बिल्वमंगलुडु, भवानी शंकरम और श्रीहरि इस लोकप्रिय,प्रसिद्ध नाटक के कुछ प्रमुख पात्र हैं।

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