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Aijaz Popular Meeruthi: Urdu Poet

Few days back I was searching for a shair of Mirza Ghalib, I found a shair but it was kind of odd and funny. I liked the way shayar manuplated last misra and made it funny.
So being curious i searched for the shayar and what i found, A huge collection of his shairs. His style of recitation was distinct and that was adding  tempo to the shers.  He has taken the famous shers of urdu ghazal and modified it to make it comical .This style of shayari, later I came to know,  is called Mazahiya shayari. The ticker flashed his name as ‘Popular Meeruthi’.
I googled for his name and found out that his real name is Syed Aijazuddin Shah and he lives in Guzri Bazaar, Karam Ali Street in Meerut.
In this article I intend to note down Dr. Popular Meeruthi’s take on of some of the popular shers by the masters.
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मैराज फ़ैज़ाबादी 
मुझको थकने नही देता ये ज़रूरत का पहाड़
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते
पॉपुलर मेरठी
साल भर हो गया गुज़रे हुये छम्मो को मगर
मुझपे मायूसी का साया नही होने देते
रोज़ करते है नयी अम्मी की बातें मुझसे
मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नही होने देते
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हफ़ीज़ मेरठी
वो वक़्त का जहाज़ था करता लिहाज़ क्या
मै दोस्तों से हाथ मिलने में रह गया
पॉपुलर मेरठी
कपड़ो की आबो ताब दिखाने में रह गया
कुछ खूबसूरतो को लुभाने में रह गया
मुर्गे की टाँग खा गये शादी में सारे लोग
मैं दोस्तों से हाथ मिलने में रह गया
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सीमब अकबराबादी
उम्र-ए-दराज़ से मांग के  लाये थे चार दिन,
दो आरजू में कट गए दो  इंतज़ार में
पॉपुलर मेरठी
महबूब वादा कर के भी आया न दोस्तों, क्या क्या ना देखो हमने किया उसके प्यार में
मुर्गे चुरा के लाये थे जो  चार ‘पॉपुलर‘ , दो आरजू में कट गए दो इंतज़ार में
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बशीर बद्र
ज़िंदगी तूने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीन
पाँव फेलाऊ तो दीवार में सर लगता है
पॉपुलर मेरठी
कितनी कंजूसी पे आमादा है ससुराल मेरी, रात की बात बताते हुए डर लगता है
ऐसे कमरे में सुला देते हैं साले मुझको , पाँव फैलाओं तो दीवार में सर लगता है
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शकील बदायूनी
ए मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यू आज तेरे नाम पे रोना आया
पॉपुलर मेरठी
अपनी महबूबा को हम दुल्हन तो बना लाए मगर
साथ में गाड़ी मिली, चाँदी ना सोना आया
कितने सस्ते में हुआ सोदा कुवारेपन का
ए मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया
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मुज़तर खेराबादी
वक़्त दो मुझ पर कठिन गुज़रे है सारी उम्र मे
इक तेरे आने से पहले इक तेरे जाने के बाद
पॉपुलर मेरठी
कर गई घर मेरा खाली मेरे सो जाने के बाद,
मुजको धड़का था की कुछ होगा तेरे आने के बाद
मैंने दोनों बार थाने में लिखाई थी रपट,
एक तेरे आने से पहले एक तेरे जाने के बाद
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मिर्ज़ा ग़ालिब
हम हैं मुश्ताक और वो बेज़ार,
या इलाही ये माजरा क्या है
पॉपुलर मेरठी
याद आने लगे चाचा ग़ालिब, या इलाही ये माजरा क्या है
ताड़ता हूँ हर इक लड़की को, वरना आँखों का फायदा क्या है
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बशीर बद्र
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
ना जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
पॉपुलर मेरठी
रहा करता है खटका जाने क्या अंजाम हो जाए,
खबर ये आम हो जाए तो फिर  कोहराम हो जाए
मुह्हबत हो गयी है डाकू सुल्ताना की बेटी से,
न जाने किस गली में ज़िन्दगी की शाम हो जाए
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अल्लामा इक़बाल
खोली है ज़ौक-ए-दीद ने आँखें तेरी अगर,
हर रहगुज़र में नक़्श-ए-कफ-ए-पा-ए-यार देख
माना की तेरी दीद के काबिल नहीं हूँ मैं,
तू मेरा शौक़ देख मेरा इंतज़ार देख
पॉपुलर मेरठी
हालां की तू जावां है मुटलउ है आज भी,
फिर भी है तुझपे कितना मुझे ऐतबार देख
खुदवा रहा हूँ कब्र अभी से तेरे लिए,
तू  मेरा शौक देख, मेरा इंतज़ार देख
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 बशीर बद्र
कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से,
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फासले से मिला करो
पॉपुलर मेरठी
कभी मेरी साडी लिया करो, कभी अपनी लुंगी लिया करो,
जो पैसे मिले मुशाइरे से उसे जेब में न रखा करो
कहा मेरी बीवी ने देख के मुझे शायरात के दरमियान,
ये  नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फासले से मिला करो
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इंशा अल्लाह ख़ान ‘इंशा’
कमर बांधे हुए चलने को यां सब यार बैठे हैं,
बहुत आगे गए, बाकी जो हैं, तैयार बैठे हैं
न छेड़ ऐ निकहत-ए-बाद-ए-बहारी! राह लग अपनी,
तुझे अठखेलियाँ सूझी हैं, हम बेज़ार बैठे हैं
पॉपुलर मेरठी
उधर महफ़िल में वो हैं जिस तरफ अग्यार बैठे हैं,
जो हम इस पार बैठे है तो वो उस पार बैठे हैं
ज़रा भी हमने उनको छेड़ा तो गुस्से में वो यह बोले,
तुझे अठखेलियाँ सूझी हैं, हम बेज़ार बैठे हैं
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मिर्ज़ा ग़ालिब
उग रहा है दर ओ दीवार से सब्ज़ा ग़ालिब
हम बयाबान में हैं और घर में बाहार आयी है.
पॉपुलर मेरठी

कबसे परदेस में हूँ घर की नही ली सुध भी
एक बच्चे की खबर आज भी यार आई है
हम को परदेस में क़ुद्रत ने ये बक़्शी इज़्ज़त
हम बयाबान में हैं और घर में बाहार आयी है.

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Other popular ghazals पॉपुलर मेरठी:
source: Rekhta

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